वशीकरण पूजा कैसे करे

वशीकरण पूजा कैसे करे
वशीकरण पूजा कैसे करे

वशीकरण पूजा कैसे करे

वशीकरण पूजा अनुष्ठान कैसे करे किसी व्यक्ति विशेष को अपने वश में कर के अपने कार्य कराने की क्रिया को वशीकरण कहते है  यह तंत्र  विद्या और टोटको से लिया जाता है इसके द्वारा प्रेम विवाह , सम्मोहन आदि क्रियाएँ की जाती है , शत्रु नाश स्त्री वशीकरण आदि में इसका उपयोग होता है |

वशीकरण पूजा कैसे करे
वशीकरण पूजा कैसे करे

१-मोहनी वशीकरण अनुष्ठान –

यह अनुष्ठान शुक्रवार को मोहनी एकादशी को किया जाता है , इसमें अनुष्ठान करने वाले व्यक्ति को मध्य रात्रि में सफ़ेद वस्त्र धारण करके , तथा सफ़ेद आसन में किसी गुप्त स्थान यह एकांत स्थान पर उत्तर दिशा में बैठ कर  किया जाता है, तथा इसमें लोहट मन्त्र का इक्कीस हजार बार जाप किया जाता है ,और सम्मोहन तंत्र,कवच , सिद्ध वशीकरण माला की आवश्यकता पड़ती है  आदि सब प्राण प्रतिष्ठित होने चाहिए । और अंत में हवन किया जाता है|

अनुष्ठान विधि-

मोहनी एकादशी में यह अनुष्ठान अत्यंत लाभकारी होता है , पर आप इसे किसी भी शुक्रवार को कर सकते है ,इसमें शुद्धता की अत्यंत आवश्यकता होती है अतः स्नान करके कांसे की थाली में तांत्रिक पूजा सामग्री को एकत्र करके यह करना चाहिए , तथा आप जिस विशेष व्यक्ति को अपने वश में करना चाहते है , उसके नाम के साथ सिध्दि का सकल्प लेना चाहिए , तथा विधि विधान से पूजा करते हुए गणेश जी के मूल मंत्र का जप एवं उनकी वन्दना करनी चाहिए, और अपने मन की प्राथना करनी चाहिये , अंत में हवन करके किसी ब्राह्मण और पाँच कुँवारी कन्याओं को भोज करना चाहिए और अंत में दान ,दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए , आप की सभी कामना पूर्ण होगी , आप के अंदर सम्मोहन क्षमता आ जायेगी आप का व्यक्तित्व में निखार आना प्रारम्भ हो जयेगा , यदि आप यह साधना करने में असमर्थ है तो मात्र प्राण प्रतिष्ठित सम्मोहन कवच को गले में पहनना चाहिए ।

२-माँ बगलामुखी अनुष्ठान –

यह अनुष्ठान अत्यंत पुराना है ,इसको  धूम्रावती महा तंत्र विद्या भी कहते है यह अत्यंत प्रसिद्ध अनुष्ठान है इसमें मध्य रात्रि में धूम्रावती जयंती के दिन करना उचित होता है , पर आप इसे शनिवार को भी कर सकते है इस अनुष्ठान को करने वाले व्यक्ति को काले वस्त्र धारण करने चाहिए तथा किसी शिवालय ,श्मशान यह कोई शुद्ध स्थान दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके काले आसन में बैठना चाहिए तथा माँ बगलामुखी के मूल मंत्र का एक लाख बार जप करना चाहिए और अंत में हवन करके प्रसाद ग्रहण करना चाहिए ।

अनुष्ठान विधि-

यह अनुष्ठान करने से पहले नदी यह गंगा स्नान करके काले वस्त्र धारण करने के बाद किसी शिवालय यह श्मशान में आधी रात्रि में पपूर्ण विधि विधान से माँ धूम्रावती के सिद्ध यंत्र की पूजा करनी चाहिए ,एक तेल का दीपक जलाकर नैवेद्य , कपूर से आरती करके माँ को गुड़हल के फूल को चढ़ाना चाहिए तथा रुद्राक्ष की माला से मंत्र का जप करना चाहिए ,मंत्र समाप्ति के बाद हवन करना चाहिए तथा अपनी मनोकामना की प्रर्थना करनी चाहिए आप के अंदर एक शक्ति का संचार होगा ,आप के शत्रुओं का नाश होगा ।

मंत्र- ॐ धूं धूं धूं  धूम्रावती स्वाहा ।

खोये प्रेम को पाने के उपाय –

आज भी बहुत प्रेमी- प्रेमिकाए आपस में प्रेम करते है तो रूठना भी होता है और मान जाना भी , पर कभी कभी दूरियां बढ़ जाती है और यह प्रेम एक के मन में समाप्त हो जाता है पर दुसरे के मन में रहता है , फिर अपने पुराने प्रेम को कैसे प्राप्त करे यह सूझता नहीं है , पर आप इसे पूजा पाठ और मंत्र जप से प्राप्त कर सकते है,

लक्ष्मी विष्णु की आराधना-

भगवान् विष्णु पालनकर्ता है ,यह हर मनोकामना पूर्ण करते है , गुरूवार  के दिन शुक्ल पक्ष में यह साधना आरम्भ करनी चाहिए और नित्य यह पूजा आपको शुद्ध होकर तीन माह तक करनी होगी ,यह एक सामान्य पूजा है इसमें केवल “लक्ष्मी विष्णु “के बीज मंत्र का जप करना होगा , तीन माला तीन माह तक और हर गुरूवार को मंदिर में प्रसाद चढ़ना चाहिए , आप के कार्यो की पूर्ति होगी,

माँ दुर्गा की आराधना –

अपने प्रेम को अपना बनाये रखने के लिए आप को माँ दुर्गा की आराधना करनी चाहिए हर शुक्रवार को मंदिर जाकर प्राथना करनी चाहिए तथा मंदिर में माँ के चरणों में लाल चुनरी चढ़ाने से मन वांक्षित फल मिलता है।

श्रीकृष्ण साधना –

भगवान् कृष्ण प्रेम के ही देवता है और कहते है की उनके रोम रोम में प्रेम बसता है ,यह हर इच्छा पूर्ण करते है , अगर आप के प्रेम में निष्ठा है कपट नहीं है , सच्चा है , वासना नहीं है , सच्चाई है , भाव है , तो कृष्ण जी के मंदिर में बाँसुरी अर्पित करनी चाहिए , ऐसा तब तक करना चाहिए जब तक आप का प्रेम स्वीकार न हो जाए और श्रीकृष्ण के इस मंत्र “ओम हुं ह्रीं सः कृष्णाय नमः”का रोजाना शुद्ध होकर जप करना चाहिए जब तक आप का प्रेम विवाह नहीं हो जाता है , यह मंत्र द्वारा आप को आप का सच्चा प्रेम फिर से प्राप्त होगा और जब आप की इच्छा पूर्ण हो जाये तब मंदिर जाकर भगवान् कृष्ण पर शहद चढ़ना और उसका छिड़काव करना चाहिए।

रुद्राभिषेक –

अपने प्रेम को पाने के लिए भगवान शिव के शरण में जाना चाहिए  एवं रुद्राभिषेक कराना चाहिए , इसे विधि विधान से करना चाहिए और इसके कठोर नियनो का पालन करना चाहिए , आप की सभी मनो कामना पूर्ण होगी, मन चाहे फल की प्राप्ति होगी |

सोलह सोमवार का व्रत-

यह व्रत बहूत प्रभावी होता है इस व्रत तो कन्यायें अपने इच्छित वर – प्रेम प्रप्ति के लिए करती है , इस व्रत को नियम पूर्वक करना चाहिए यह भी भगवान शिव को प्रसन्न करने वाला व्रत है , इस व्रत को करने वाले की हर मुराद पूरी होती है।

प्रेम रक्षा मंत्र –

अगर आप अपने प्रेम को बचा कर रखना चाहते है और आप डर है कि  आपके प्रेम कोई चुरा लेगा तो आप प्रेम रक्षा मंत्र का निरंतर  एक सप्ताह तक लाल वस्त्र पहनकर कुमकुम का तिलक लगा कर 1000 बार ” ओम हीं नमः” इस मंत्र का जप करना चाहिए ।

शुक्र मंत्र-

प्रेम बढ़ाने के लिए तथा अपने प्रेम को पुनः प्राप्त करने के लिए ,अपने खोये हुए प्रेम को प्राप्त करने के लिए एवं अपने प्रेम को सदैव एक दुसरे के अन्दर जीवन रखने के लिए शुक्र मंत्र “ॐद्रां, द्रीं, द्रौं सःशुक्राय नमः” का हर शुक्रवार विधि पूर्वक  जप करना चाहिए , बिछड़ा प्रेम पुनः प्राप्त होगा सभी इच्छाएं पूर्ण होगी ,

 

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वशीकरण विधि वशीकरण एक आद्यात्मिक कला है जिसको बहुत कठिन आत्मिक तपस्या के बल से प्राप्त किया जाता है. वशीकरण विधि को एक बार प्राप्त कर के आप अपना मनचाहा काम पल भर मे पूरा कर सकते हो.वशीकरण विधि का दुरूपयोग करने से ये विधि काम करना बंद कर देती है, इसलिए धारक को ये सलाह दे जाती है की वो वशीकरण विधि का वही उपयोग करे जहा इसकी वास्तव मे नेक कार्य मे जरुरत हो.किसी भी कार्य के अनुसार वशीकरण की अलग अलग विधि उपयोग मे लायी जाती है. एक वास्तव वशीकरण विधि धारक वो है जो समस्या को समझ के सही वशीकरण विधि का उपयोग करे.