कामाख्या देवी मंत्र

कामाख्या देवी मंत्र
कामाख्या देवी मंत्र

कामाख्या देवी मंत्र

वशीकरण शब्द कहने में जितना आसान है उतना ही मुश्किल साधने में है! वशीकरण विद्या प्राचीन विद्या है और यह तंत्र की अष्ट कर्म सिधिकर्म,शान्तिकर्मा ,रोगनाशक कर्म , वशीकरण ,विद्वेषण ,स्तम्भन ,उचाटन ,और मारण कर्म ) में से एक है!
वैसे तो वशीकरण एक असामान्य विद्या है परंतु यह एक विज्ञान ही है। इस विद्या को पाना मुश्किल ही सही परंतु असंभव नहीं है। अधिकतर लोग सोचते हैं कि वशीकरण किया कैसे जाए…? सभी को किसी ना किसी को अपने वश में करना है। कर्मचारी चाहता है कि उसका बॉस उसके वश में हो और उसे जब चाहे छुट्टी मिल जाए… पत्नी सोचती है पति वश में रहे, यही सोच पति की भी होती है… कोई सोचता है मेरे सभी दोस्त में वश हो जो मैं बोलू सभी वैसा ही करें… लड़कों को लड़कियों को वश में करना है तो लड़कियों को लड़के अपने वश में चाहिए। सामान्यत: ऐसे ही सोच सभी की हैं। वशीकरण है क्या…? यही कि जो आप बोले, जो आप चाहे… वह ही हो जाए।

कामाख्या देवी मंत्र
कामाख्या देवी मंत्र

वशीकरण का प्रयोग आप किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के लिए कर सकते हैं ! वशीकरण हर जगह कारगर है चाहें व्यक्ति इस दुनिया में कही भी रह रहा हो ! वशीकरण के लिए सिर्फ सच्चे भावनात्मक जुडाव की जरूरत है, यदि आप सच में किसी व्यक्ति या व्यक्तियों से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं तो वशीकरण 100% कामयाब होगा !
वशीकरण शक्ति का प्रयोग आप निम्न कार्य के लिए कर सकते हैं :
– अपने पसंद के पुरुष या स्त्री को जीवनसाथी बनाने हेतु
– प्रेम या विवाह में बाधा को समाप्त करने के लिए
– किसी विशेष व्यक्ति या लोगों के समूह को वश में करने के लिए
– अपने पति या पत्नी को वश में करने हेतु
– अपने सास – ससुर को वश में करने हेतु
– अपने बॉस या ग्रहण को वश में करने हेतु
– अपने शत्रु/शत्रुओं पर काबूत पाने हेतु
– अपने बेटी या बेटे को गलत संगत से बचाने हेतु
– इंटरव्यू में निश्चित सफलता हेतु
– सुख एवं समृधि को अपनी और आकर्षित करने हेतु
वशीकरण विद्या अर्जित करना बहुत ही मुश्किल एवं जटिल है जिस कारण अक्सर यह सुझाव दिया जाता है की आप वशीकरण प्रयोग किसी विद्वान् वशीकरण विशेषज्ञ से ही करवाएं !
श्री कामख्या देवी विधान
कामख्या देवी जी का मंदिर ओसिशा में है अतएव देवी की पूजा वही के पुजारी कर सकते है।

कामाख्या-मन्त्र’ का विनियोग, ऋष्यादि-न्यास उक्त ‘कामाख्या-मन्त्र’ के विनियोग, ऋष्यादि-न्यासादि इस प्रकार हैं-
।। विनियोग ।।
ॐ अस्य कामाख्या-मन्त्रस्य श्रीअक्षोभ्य
ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द: , श्रीकामाख्या देवता, सर्व- सिद्धि-प्राप्त्यर्थे जपे विनियोग:।
।। ऋष्यादि-न्यास ।।
श्रीअक्षोभ्य-ऋषये नम: शिरसि,
अनुष्टुप्-छन्दसे नम: मुखे,
श्रीकामाख्या-देवतायै नम: हृदि,
सर्व- सिद्धि-प्राप्त्यर्थे जपे विनियोगाय नम: सर्वाङ्गे।
।। कर-न्यास ।।

त्रां अंगुष्ठाभ्यां नम:,
त्रीं तर्जनीभ्यां स्वाहा,
त्रूं मध्यमाभ्यां वषट्,
त्रैं अनामिकाभ्यां हुम्,
त्रीं कनिष्ठिकाभ्यां वौषट्,
त्र: करतल-कर-पृष्ठाभ्यां फट्।

।। अङ्ग-न्यास ।।
त्रां हृदयाय नम:,
त्रीं शिरसे स्वाहा,
त्रूं शिखायै वषट्,
त्रैं कवचाय हुम्,
त्रौं नेत्र-त्रयाय वौषट्,
त्र: अस्त्राय फट्।

कामाख्या देवी का ध्यान:-
उक्त प्रकार न्यासादि करने के बाद भगवती कामाख्या का निम्न प्रकार से ध्यान करना चाहिए-
भगवती कामाख्या लाल वस्त्र-धारिणी, द्वि-भूजा, सिन्दूर-तिलक लगाए हैं।भगवती कामाख्या निर्मल चन्द्र के समान उज्ज्वल एवं कमल के समान सुन्दर मुखवाली हैं।भगवती कामाख्या स्वर्णादि के बने मणि-माणिक्य से जटित आभूषणों से शोभित हैं। भगवती कामाख्या विविध रत्नों से शोभित सिंहासन पर बैठी हुई हैं। भगवती कामाख्या मन्द-मन्द मुस्करा रही हैं। भगवती कामाख्या उन्नत पयोधरोंवाली हैं। कृष्ण-वर्णा भगवती कामाख्या के बड़े-बड़े नेत्र हैं। भगवती कामाख्या विद्याओं द्वारा घिरी हुई हैं। डाकिनी-योगिनी द्वारा शोभायमान हैं। सुन्दर स्त्रियों से विभूषित हैं। विविध सुगन्धों से सु-वासित हैं। हाथों में ताम्बूल लिए नायिकाओं द्वारा सु-शोभिता हैं।भगवती कामाख्या समस्त सिंह-समूहों द्वारा वन्दिता हैं। भगवती कामाख्या त्रि-नेत्रा हैं। भगवती के अमृत-मय वचनों को सुनने के लिए उत्सुका सरस्वती और लक्ष्मी से युक्ता देवी कामाख्या समस्त गुणों से सम्पन्ना,
असीम दया-मयी एवं मङ्गल- रूपिणी हैं।

उक्त प्रकार से ध्यान कर कामाख्या देवी
की पूजा कर कामाख्या मन्त्र का ‘जप’ करना चाहिए।’जप’ के बाद निम्न प्रकार से ‘प्रार्थना’ करनी चाहिए।

कामाख्ये काम-सम्पन्ने, कामेश्वरि! हर-प्रिये!
कामनां देहि मे नित्यं, कामेश्वरि! नमोऽस्तु ते।।
कामदे काम-रूपस्थे, सुभगे सुर-सेविते!
करोमि दर्शनं देव्या:, सर्व-कामार्थ-सिद्धये।।
अर्थात् हे कामाख्या देवि! कामना पूर्ण करनेवाली,कामना की अधिष्ठात्री, शिव
की प्रिये! मुझे सदा शुभ कामनाएँ दो और
मेरी कामनाओं को सिद्ध करो। हे कामना
देनेवाली, कामना के रूप में ही स्थित
रहनेवाली, सुन्दरी और देव-गणों से सेविता
देवि! सभी कामनाओं की सिद्धि के लिए मैं
आपके दर्शन करता हूँ।

कामाख्या देवी का २२ अक्षर का मन्त्र ‘कामाख्या तन्त्र’ के चतुर्थ पटल में कामाख्या देवी का २२ अक्षर का मन्त्र उल्लिखित है ll मन्त्र त्रीं त्रीं त्रीं हूँ हूँ स्त्रीं स्त्रीं कामाख्ये प्रसीद स्त्रीं स्त्रीं हूँ हूँ त्रीं त्रीं त्रीं स्वाहा ll

उक्त मन्त्र महा-पापों को नष्ट करनेवाला, धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष देनेवाला है। इसके ‘जप’ से साधक साक्षात् देवी-स्वरूप बन जाता है। इस मन्त्र का स्मरण करते ही
सभी विघ्न नष्ट हो जाते हैं।इस मन्त्र के ऋष्यादि ‘त्र्यक्षर मन्त्र’ (त्रीं त्रीं त्रीं) के समान हैं।’ध्यान’ इस प्रकार किया जाता हैमैं योनि-रूपा भवानी का ध्यान करता हूँ, जो कलि-काल के पापों का नाश करती हैं और समस्त भोग-विलास के उल्लास से पूर्ण करती हैं।मैं अत्यन्त सुन्दर केशवाली, हँस-मुखी, त्रि-नेत्रा, सुन्दर कान्तिवाली,
रेशमी वस्त्रों से प्रकाशमाना, अभय और वर-मुद्राओंसे युक्त, रत्न-जटित आभूषणों से भव्य, देव-वृक्ष केनीचे पीठ पर रत्न-जटित सिंहासन पर विराजमाना, ब्रह्मा-विष्णु-महेश द्वारा वन्दिता, बुद्धि-वृद्धि-स्वरूपा, काम-देव के मनो-मोहक बाण के समान अत्यन्तकमनीया, सभी कामनाओं को पूर्णकरनेवाली भवानी का भजन करता हूँ।

मेरे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण साधना है,इस साधना मे साधक “कामरुप यंत्र” और “काली हकिक” माला जो रात्री सुक्त के जाप से प्राण-प्रतिष्ठीत हो इनका उपयोग साधना मे करे तो शीघ्र लाभ प्राप्त होता है अन्यथा आप बिना सामग्री के भी साधना कर सकते है.इस साधना की विशेष सामग्री अगर आपको चाहिये तो 1150/-रुपये मे आप प्राप्त कर सकते है.
कामख्या सिधि चालीसा कोई भी स्वच्छ आसन पर बेठ कर पढ़ सकते l
कामख्या सिधि चालीसा
कामाख्ये बरदे देवी नील पर्वत वासिनी ,
त्वँ देवी जगताँ मातर्थोनिमर्दे नमोस्तुते ।।
कमाख्ये कामसम्पने कामेश्वरी हरि प्रिये ,
कामनाँ देहि मे नित्यँ कामेश्वरी नमोऽसुतुते ।।
श्री कामाख्या चालीसा
जय महाशक्ति कामाख्ये , नावहुँ तब पद नाथ ,
कष्ट हरणि मँगल करनी, सदा रहहु मम साथ,
सर्व जगशक्ति महा , कामाख्ये जगदम्ब ,
षट विकार मुझमे भरे पनहु मात अवलम्ब ,
जय जय जय कामाख्या देवी ,
सुर नर,असुर , नाग जग सेवी, ।।1।।
सृजन कारिणी विश्व विधात्री ,
जग सँहारिणी सब सुख देत्री ।।2।।
क्ति कहाँ जो तुम गुण गावै ,
शरण गहै जन सर्वस पावै ..
सती कीन्ह मख प्राण विसर्जन ,
ले शव चले पुरारी निरजँन ,
चिन्मय सती देस शिव परसे ,
दिव्य शक्ति सब शव बीच बरसे,
हरि तब तर्केउ विश्व विनाशा .
भजेउ चक्र सती सब पासा ,
काटा पँच दशक एक खण्डा ,
अँश गिरा प्रगटे बरिबँडा ,
महा भाग ( योनिमुद्रा) निलाचल परेउ,
धन्य भाग जन जन सब तरेउ,।।8।।
ऋद्धि सिद्धि धारी विभूति अनुपा,
महाशक्ति कामाख्या रूपा,
जल थल नभ रवि शशि ग्रह तारा ,
कण कण तेजो ज्वल जग सारा ,

मातु नाम है तोर अन्नता ,
श्रुति पुराण सब गावहि सँता ,
तु निराकार है शक्ति स्वरूपा,
लीला हेतू धरत सब रूपा ,
शैलपुत्रि तु ब्रह्म चिरिणी ,
चामुण्डा तु क्लेश हारिणी ,
तु कात्यायनी काल रात्री ,
स्कन्ध माते तु सिद्धि दात्री ,
तु ही चँद्रघटा घट वासिनी ,
महागोरी तु गौरव हासिनी ,
तु ही देवी ललिता माता ,
हे वैष्णवी सब सुख दाता ,
तु धुमावती कमला काली ,
छिन्नमस्ता हो जगत सुपाली ,
बगलामखी भुवनेश्वरी तारा ,
षोडषी भरवी कष्ट निवारा,
माँतगी सावित्री माता ,
तु कल्याणी सब जग त्राता,
ज्वालामुखी शीतला अम्बा ,
विन्ध्यवासिनी तु जगदम्बा ,
त नन्दा मुम्बा मिनाक्षी ,
मनसा मौलाक्षी कामाक्षी ,
गायत्री दुर्गा सन्तोषी,
मूल प्रकृति त्रिभूवन पोषी ,
नाना शस्त्र मातु है तेरे,
विधि हरिहर सुर मुनि चेरे ,
पुण्य पाप सब सुख दुख अँशा ,
पुरण करो मात मम मँशा ,
मातु मोर अब कीजै रक्षा ,
सहश होत नही और परीक्षा ,
हरहु मातु मम विपदा भारी,
तुम तजि अब मै केह निहारी ,
सुर सरि तजि चह कुप खनावा ,,
तजि पियुष खार जल पाऔ ,
तृण न हिलै मातु बिन चाहे,
महाशक्ति तजो पुजो काहे ,
कैस्हहु विप पडे बड भारी ,
नाम लेत दु: ख देत निवेरी,
निर्धन पुत्र हीन जौ जाई ,
धरै ध्यान कामाख्या माई,
सँकट कटन न होत विलम्बा ,
रण भू बीच वह बनै अवलम्बा,
कल रोग भागै सुनि नामा ,
ऋद्धि सिद्धि दे पुरवहु कामा ,
कामाख्या को क्षत्र चढावै,
धुप दीप जो रोज जलावै ,
नारियल चुन्री और प्रसादा,
साडी कमल और कन्या ज्योनारा ,
अम्बुवाची पावन लीला ,
माँ का दरशन करै जो शीला,
कोटि लिँग भुनेश्वरी भवानी,

दस महाविद्या का प्रियतम पावन ,
गुप्त नवरात्र मे भर दे आँगन ,
गुरू वशिष्ट और मच्छेन्द्र नाथ गावै ,
इसामाइल , उमानाथ भी माँ माँ गावै ,
उँच्ची निलाचल गगन पसारा ,
ब्रह्म पुत्र और शुकेश्वर धारा ,
नीलाचल सर्व शिखर अपारा,
नरकासुर को श्री कृष्ण पछारा,
पाठ करै जो नित चालीसा ,
पावै सुफल साक्षी जगदीशा,
विविध मनोरथ प्राग्यज्ययोतिष पुर पाई ,
धन जन मन दे कामाख्या माई ,
सत रड तम तीनो गुण तेरे ,
अवगुण हरहु मात सब मेरे ,
तँत्र सिद्धि मौक्ष दायिनी ,
माँ कामरूप पाप विनाशिनी ,
कालिका पुराण तेरे गुण गावै ,
रामदेव को शरण लगाऔ ,
हम भक्तो को हरष जगाऔ ,
सुत चाहे जैसा रहे – मातु तजहु नही साथ ,
भोला भाला तेरा लाल है तोह नवात माथ ,
जय माँ कामख्या । जय क्षिप्र गण नाथ जी . कोटि कामना लिँग बाबा जी |

 

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वशीकरण विधि वशीकरण एक आद्यात्मिक कला है जिसको बहुत कठिन आत्मिक तपस्या के बल से प्राप्त किया जाता है. वशीकरण विधि को एक बार प्राप्त कर के आप अपना मनचाहा काम पल भर मे पूरा कर सकते हो.वशीकरण विधि का दुरूपयोग करने से ये विधि काम करना बंद कर देती है, इसलिए धारक को ये सलाह दे जाती है की वो वशीकरण विधि का वही उपयोग करे जहा इसकी वास्तव मे नेक कार्य मे जरुरत हो.किसी भी कार्य के अनुसार वशीकरण की अलग अलग विधि उपयोग मे लायी जाती है. एक वास्तव वशीकरण विधि धारक वो है जो समस्या को समझ के सही वशीकरण विधि का उपयोग करे.